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મંગળવાર, 21 ઑગસ્ટ, 2012

आस्था


किसी ने कहा
अन्धेरा हो गया
मैंने कहा
अँधेरा नहीं हुआ
उजाला चला गया
कोई बोला सर्दी आ गयी
मैं बोला गर्मी चली गयी
फिर किसी ने कहा
इश्वर होता है
मैंने पूछा
क्या तुम ने देखा है
उत्तर मिला
मुझे इश्वर में आस्था है
मैंने कहा
जैसा मानोगे ,
जैसा सोचोगे
वैसा ही देखोगे
क्यों नहीं
घ्रणा में प्यार देखो
इर्ष्या में
सदभावना देखो
इर्ष्या करोगे इर्ष्या
पाओगे,
घ्रणा करोगे घ्रणा
पाओगे
विश्वास करोगे विश्वास
पाओगे
अच्छा सोचोगे अच्छा
करोगे
खुशी से जीवन  जियोगे

तुम्हारा अहसास ही काफी है


तुम्हारी हर अदा
जहन में 
उतर जाती है
तुम्हारी हर बात
दिल को छूती है
तुम्हारी खुशबू
मदहोश करती है
तुम्हें पाया तो नहीं
जीने के लिए
तुम्हारा अहसास ही
काफी है
 

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